भटकती रूह की सच्ची कहानी..

भूत-प्रेत के किस्से सुनने में बेहद रोमांचक और दिलचस्प लगते हैं लेकिन क्या हो जब यह किस्से सिर्फ किस्से ना रहकर एक हकीकत की तरह आपके सामने आएं? आज की युवा पीढ़ी भूत और आत्माओं के होने पर…

क्या वह बस एक डरावना सपना था?

कहते हैं आत्मा, भूत-प्रेत, पिशाच, डायन जैसी कोई चीज नहीं होती, यह तो बस इंसानी मस्तिष्क का वहम होता है. लेकिन यह बात भी सच है कि जब तक इन सब चीजों से सामना ना हो तब तक…

उस रात (लेखक : राकेश ‘सोहम’)

मुझे ऑटोमोबाइल इंजीनियरिंग में दाखिला मिला था । होस्टल भर चुका था । फ़िर वार्डन से बार-बार अनुग्रह करने पर बताया गया की एक कमरा अब भी खाली है, लेकिन वह पूरा कबाड़खाना है और साफ़-सफाई कराना पड़ेगी…

भूतों की भूतनी (लेखक : रतन सिंह शेखावत)

एक गांव में एक ताऊ रहता था उसकी पत्नी ताई बहुत खुर्राट थी उसने नियम बना रखा था कि सुबह उठते ही घर के बाहर एक नियत जगह पर ताऊ को खड़ाकर रोज उसके बीस जूते जरुर मारने…

एक गाँव जहां घुमती है अनेको डायन

अनहोनी घटनाएं: वो घटनाएं जो सुनी तो हैं, लेकिन महसूस शायद कुछ ही लोगों ने लिया। अक्सर बात तो होती है, लेकिन सच्चाई से रूबरू होने को कोई तैयार नहीं। ऐसी ही एक कहानी है डायन और चुडैलों…

जब भुत दिखा जंगल में

दुनिया भर में भूत-प्रेत की बातें प्रचलित हैं। कानपुर से लेकर कैलिफोर्निया तक लोग भूतो की बातें करते हैं। महफिलों, पार्टियों में होने वाली गपशप का एक अभिन्न अंग हैं यह भूत चर्चा। लोग भी एक से बढ़…

जंगल में भुत (लेखक : बसंत भट्ट)

दोस्तों आज में आपको जो कहानी सुनाने जा रा रहा हूँ वह शिकार के बारे में है ! वैसे तो शिकार करना गैर क़ानूनी है ! फिर  भी  लोग करते शिकार रहते है ! कोई शौक के लिए…

भुत, वहम, संयोग या सत्य ?

रात के लगभग १२ बज रहे थे. जनवरी का महिना, दिनांक: २७, वर्ष: २००९, स्थान: दिल्ली के साकेत में मेरा किराये पर लिया गया फ्लैट. मेरे फ्लैट में दो कमरे है, एक अन्दर की ओर और बाहर की…

चकराता का भुतहा डाक बंगला

बात पुरानी है .घूमने फिरने के शौक के चलते चकराता का कार्यक्रम बना और वहां जाने रुकने के लिए हरिद्वार के संवादाता सुनील दत पांडेय ने परमिट वगैरह बनवा दिया क्योकि सारा इलाका सेना के अधीन है ….

Adbhut (Hindi Novel), अद्भुत ( हिन्दी उपन्यास) – चेप्टर 1

घना अंधेरा और उपरसे उसमें जोरोसे बरसती बारीश. सारा आसमंत झिंगुरोंकी ‘किर्र’ आवाजसे गुंज रहा था. एक बंगलेके बगलमें खडे एक विशालकाय वृक्षपर एक बारीशसे भिगा हूवा उल्लू बैठा हूवा था. उसकी इधर उधर दौडती नजर आखीर सामने…