अद्भुत ( हिन्दी उपन्यास) – चेप्टर 34

डिटेक्टीव्ह सॅम सुबह सुबह हॉलमें बैठकर चाय पीते हूए टीव्ही देख रहा था. एक एक घूंट धीरे धीरे पिते हूए मानो वह चायका आनंद ले रहा हो. देखनेके लिए तो वह टिव्हीकी तरफ देख रहा था लेकिन उसके दिमागमें कुछ अलगही विचारोंका तुफान मचा हूवा था. शायद वह उस कातिलके केसके बारेमेही सोच रहा होगा. जैसे जैसे उसके विचार दौड रहे थे वैसे वैसे वह रिमोटके बटन दबाकर तेजीसे चॅनल्स बदल रहा था. आखिर वह कार्टून चॅनलपर आकर रुका. थोडी देर कार्टून चॅनल देखकर शायद उसने खुदको लगातार टेन्शन्स, चिंता इससे हटाकर फिरसे ताजा किया हो. फिरसे उसने चॅनल बदला और अब वह डिस्कव्हरी चॅनल देखने लगा. शायद डिस्कव्हरीपर चल रहे प्रोग्रॅममें उसे इंटरेस्ट आने लगा था. उसने रिमोट अपने हाथसे बगलमें रख दिया और वह प्रोग्रॅम ध्यान देकर देखने लगा.

डिस्कव्हरी चॅनलपर चल रहे प्रोग्रॅममे एक चूहा दिखाया जाने लगा. उस चूहेके गलेमे एक छोटा पट्टा दिख रहा था और सरको एकदम छोटे छोटे वायर्स लगाए दिख रहे थे. फिर टीव्ही ऍन्कर बोलने लगा –

” जब कोई जिवजंतू कोई क्रिया करता है उसे वह क्रिया करनेके लिए उसके दिमागको एक सिग्नल जाता है. अगर हम एकदम वैसाही सिग्नल उसके दिमागको बाहरसे देनेमे कामयाब हो गए तो हम उस जिवजंतूको अपने कब्जेमें कर सकते है. और उसे बाहरसे सब सिग्नल्स देकर उससे हमे जो चाहिए वह क्रिया करवाके ले सकते है.”

फिर टिव्हीपर एक कॉम्प्यूटर दिखने लगा. कॉम्पूटरके सामने एक वैज्ञानिक बैठा हूवा था.

डिटेक्टीव्ह सॅम टिव्हीपर चल रहा प्रोग्रॅम एकदम ध्यान लगाकर देखने लगा.

वह कॉम्पूटरके सामने बैठा वैज्ञानिक बोलने लगा –

” इस कॉम्प्यूटरके द्वारा हम अलग अलग सिग्नल्स इस चिपपर, जो की इस चूहेके गलेमें लगे पट्टेमें बंधी हूई है, उसपर ट्रान्समिट कर सकते है. इस चिपके द्वारा यह सिग्नल चूहेके दिमागतक पहूचेंगे. और फिर जो जो सिग्नल्स हम उसे इस कॉम्प्यूटरके व्दारा देंगे उसके हिसाबसे वह चूहा अलग अलग कार्य करने लगेगा ”

फिर टिव्हीपर वह चूहा एकदम नजदिकसे दिखाया गया. एक छोटीसी चिप उसके गलेमें पट्टा बांधकर उसमें लगाई गई थी.

डिटेक्टीव्ह टिव्हीपर चल रहा प्रोग्रॅम देख रहा था. उसके चेहरेपर आश्चर्य और उत्सुकताके भाव दिख रहे थे.

टिव्हीपर वह वैज्ञानिक आगे बोलने लगा –

” इस प्रकार हम अलग अलग तरहके आदेश इस सिग्नल ट्रान्समिशनके द्वारा उस चूहेको दे सकते है. अब फिलहाल हम कुछ दो चार आदेशही उसे देनेमें कामयाब हूए है. ”

फिर कॉम्प्यूटरके मॉनिटरपर चल रहे सॉफ्टवरमें उस वैज्ञानिकने माउसकी सहायता से ‘राईट’ बटन दबाया. और क्या आश्चर्य वह चूहा दाई तरफ मुडकर दौडने लगा.

कॉम्प्यूटरपर उस वैज्ञानिकने ‘स्टॉप ‘ यह बटन दबाया और वह चूहा एकदम दौडते हूए रुक गया.

फिर उसने ‘लेफ्ट’ बटन दबाया और वह चूहा बाई तरफ मुडकर दौडने लगा.

आगे उसने ‘जम्प’ यह बटन दबाया और उस चूहे ने दौडते हूए छलांग लगाई.

फिरसे उसने ‘स्टॉप’ बटन दबाया और वह चूहा एक खानेके जिन्नसके सामने पहूंच गया था वही रुक गया.

वैज्ञानिकने ‘ईट’ बटन दबाया और वह चूहा उसके सामने रखा हूवा खानेका जिन्नस खाने लगा.

फिरसे उसने ‘स्टॉप’ बटन दबाया और उस चूहेने खाना बंद किया.

अब वैज्ञानिकने ‘अटॅक’ बटन दबाया और वह चूहा उसके सामने रखे हूए खानेके जिन्नस ना खाते हूए उसके तोड तोडकर टूकडे करने लगा.

यह सब देखते हूए अचानक सॅमके दिमागमें एक विचार कौंध गया.

उसे एक एक प्रसंग याद आने लगा…

…दो पुलिस टीमके मेंबर रिचर्ड और इरीक रोनॉल्डके घरकी सर्कीट टिव्हीपर जब निगरानी कर रहे थे तब एक बिल्लीने सर्कीट टीव्हीके ट्रान्समिटर युनिटपर छलांग लगाई थी. और उसकी वजहसे रोनॉल्डके बेडरुमकी सब हरकते टिव्हीपर दिखना बंद हूवा था. और जबतक रिचर्ड और इरिक बेडरुममें पहूंचते नही तबतक कत्ल हो चूका था.

डिटेक्टीव्ह अपनी सोचमें डूबा हूवा टिव्हीके सामनेसे उठ गया. उसे अगला प्रसंग याद आने लगा. …

… जब डिटेक्टीव्ह सॅम और उसकी टीम इन्व्हेस्टीगेशनके लिए रोनॉल्डके बेडरुममें गए थे. और इन्व्हेस्टीगेशन करते वक्त सॅमने बेडके निचे झुककर देखा था. तब उसे बेडके निचे दो चमकती हूई आंखे दिखाई दी थी.

जब वह आंखे धीरे धीरे उसकी तरफ आकर अचानक हमला कीये जैसी उसपर झपट पडी थी, उसने छटसे वहांसे हटकर अपना बचाव किया था. और बादमें देखा तो गलेमें काला पट्टा पहनी हूई काली बिल्ली कॉटके निचेसे बाहर आकर दरवाजेसे बेडरुकके बाहर दौडकर जाते हूए दिखाई दी थी.

अब सॅमके दिमागमें एक एक गुथ्थी एकदम स्पष्टतासे सुलझ रही थी.

अब मुझे समय गवांना नही चाहिए … .

मुझे जो कुछ भी करना है जल्दी करना चाहीए…

सोचते हूए डिटेक्टीव अगले कार्यवाहीके लिए तेजीसे घरके बाहर निकल पडा.

क्रमश…

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