अद्भुत ( हिन्दी उपन्यास) – चेप्टर 41

सॅम और उसका साथीदार अबभी ऍन्थोनीको घेरकर खडे थे. ऍन्थोनीका प्रतिरोध अब पुरी तरह खत्म हो चूका था. सॅमके दो साथीयोंने उसे हथकडीयां लगाकर अपने कब्जेमें लिया था. सॅम उसे वहीं सवालपर सवाल पुछे जा रहा था. आखीर एक सवाल अबतक सबको परेशान कर रहा था. सॅमकोभी लग रहा था की बादकी तहकिकात जब होगी तब होगी. कमसे कम सबको परेशान कर रहे सवाल का जवाब यही मिलना चाहिए. की क्यो? क्यो ऍन्थोनीने उन चार लोगोंका कत्ल किया ?

ऍन्थोनीकेभी अब पुरी तरह खयालमें आया था की उसे अब सबकुछ बतानेके अलावा कुछ चारा नही था. वह सबकुछ किसी तोतेकी तरह बताने लगा…

…. वे पुराने जॉन, नॅन्सी और ऍन्थोनीके कॉलेजके दिन थे. क्लासमें प्रोफेसर पढा रहे थे और विद्यार्थीयोंमे जॉन, नॅन्सी और ऍंथोनी क्लासमें अलग अलग जगह पर बैठे हूए थे. ऍथोनीने सामने देखते हूए, प्रोफेसरका खयाल अपने तरफ नही है इसकी तसल्ली कर छूपकेसे एक कटाक्ष नॅन्सीकी तरफ डाला. लेकिन यह क्या? वह उसके तरफ ना देखते हूए छूपकर जॉनकी तरफ देख रही थी. वह आग बबुला होने लगा था.

मै इस क्लासका एक होनहार विद्यार्थी…

एकसे एक लडकियां मुझपर मरनेके लिए तैयार …

लेकिन जिसपर अपना दिल आया वह मेरे तरफ देखनेके लिए भी तैयार नही है? …

उसके अहमको ठेंस पहूच रही थी.

नही यह होना मुमकीन नही…

शायद उसे अपना दिल उसपर आया है यह पता नही होगा…

उसे यह जताना और बताना जरुरी है …

उसे यह मालून होनेके बाद वह अपनेआप मुझपर मरने लगेगी…

सोचते हूए उसने मनही मन कुछ तय किया.

दौपहरका वक्त था. कॉलेज अभी अभी छूटा था और नॅन्सी अपने घर वापस जा रही थी. ऍंथोनी पिछेसे तेजीसे चलते हूए उसके पास पहूंचनेका प्रयास कर रहा था. वह उसके नजदिक पहूंचतेही उसने पिछेसे उसे आवाज दिया, ” नॅन्सी”

पिछेसे आया आवाज सुनतेही वह रुक गई और मुडकर पिछे देखने लगी. ऍन्थोनी जॉगींग किये जैसा झटसे उसके पास पहूंच गया.

” क्या? … ऍन्थोनी” उसने आश्चर्यसे उसे पुछा.

क्योंकी वह सामान्य रुपसे किसीसे बात नही करता था.

और आज ऐसा पिछे पिछे दौडकर आते हूए अपनेसे बात कर रहा है …

वह क्लासमें टॉप होनेसे उसे उसके प्रती एक आदर था. उसेही क्यूं क्लासके सारे लडके लडकियोंको उसके प्रती आदर था.

” नही … मतलब … तुमसे एक जरुरी बात करनी थी ” उसने कहा.

नॅन्सीने उसके चेहरेकी तरफ गौरसे देखा और उसे उससे क्या बात करनी होगी यह वह समझनेकी कोशीश करने लगी. अब दोनो साथ साथ चलने लगे थे.

” नही … मतलब … ऍक्चूअली..” वह सही शब्दोंको चूनकर एकसाथ लानेकी कोशीश करते हूए बोला, ” मतलब … मुझे तुम्हे प्रपोज करना था … विल यू मॅरी मी” उसने सारे महत्वपूर्ण शब्द चून लिए और झटसे उसे जो बोलना था वह बोलकर राहतकी सांस ली.

अचानक वह ऐसा कुछ बोलेगा ऐसा नॅन्सीने नही सोचा था.

वह मजाक तो नही कर रहा है ? …

उसने उसके चेहरेकी तरफ फिरसे गौरसे देखा और उसके चेहरेके भाव पढनेकी कोशीश की.

कमसे कम उसके चेहरेसे वह मजाक कर रहा हो ऐसा बिलकुल प्रतित नही हो रहा था…

” आय ऍम सिरीयस ” उसने उसकी हडबडाहट देखकर कहा.

फिरसे नॅन्सीने उसके भाव समझनेकी कोशीश की. वह उसे उसके क्लासमें होनेसे अच्छी तरह जानती थी. उसे उसका स्वभाव अच्छी तरहसे मालूम था. इस तरहकी मजाक करना उसका मूलभूत स्वभाव नही था. और नॅन्सीका स्वभाव स्पष्टवादी था. इसलिए झटसे उसने उसके बारेंमे अपनी भावनाएं व्यक्त की. आखिर वह जॉनसे प्यार करती थी.

” ऍन्थोनी… आय ऍम सॉरी बट आय कांन्ट” उसने कहा.

ऍन्थोनीको इसकी उम्मीद नही थी. वह आश्चर्यसे उसके चेहरेकी तरफ देखने लगा.

इतनी सहजतासे वह मुझे कैसे ठूकरा सकती है? …

उसके अहंकारको ठेंस पहूंच रही थी.

” लेकिन क्यो?” वह अब पुरी तरह चिढ चूका था.

वह तेजीसे आगे आगे चल रही थी और वहभी तेजीसे चलते हूए उसके साथ चलनेकी कोशीश कर रहा था.

” देखो मै क्लासमे टॉपर हूं … आगे कॉलेज खतम होनेके बाद न्यूरॉलाजीमें रिसर्च करनेका मेरा इरादा है … मेरे सामने एक उज्वल भविष्य पडा हूवा है … और मुझे यकिन है की अगर मुझे तुम्हारे जैसे सुंदर लडकिका साथ मिलता है तो मै जिंदगीमें औरभी बहुत कुछ हासिल कर सकता हूं ” वह उसे समझानेकी कोशीश कर रहा था.

” ऍंथोनी.. तुम एक अच्छे लडके हो, बुद्धीमान हो… इसमें कोई शक नही है… लेकिन मै तुम्हारे साथ शादीके बारेमें नही सोच सकती. ” वहभी अब उसे समझानेकी कोशीश करने लगी.

” लेकिन क्यों? ” वह गुस्सेसे बोला, ” … तुम्हे पता है? … मै तुम्हे कितना चाहता हूं …” वह अब गिडगिडाने लगा था.

” फिरभी मै ऐसा नही कर सकती..” वह बोली.

” लेकिन क्यों? … यह तो बता सकती हो” वह गुस्सेसे चिल्लाया.

” क्योंकी मै किसी दुसरेको चाहती हूं… ” वह बोली.

वह अबभी आगे चल रही थी. लेकिन ऍंथोनी अब रुक गया था. वह पिछेसे घोर निराशासे उसे जाता हूवा देखता रहा.

क्रमश:…

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