अद्भुत ( हिन्दी उपन्यास) – चेप्टर 42

शामका वक्त था. पार्कमें प्रेमी युगल बैठे मौसम का आनंद ले रहे थे. ठंड हवाके झोंकोकेसाथ बागमें फुल मस्त मस्तीमें डोल रहे थे. उस पार्कके एक कोनेमें निचे हरे हरे घासके गालीचेपर, एक बडे पेढके तनेका आधार लेकर नॅन्सी आरामसे बैठी थी. जॉन अपना सर नॅन्सीके गोदमे रखकर घासपर लेट गया था.

” तुम्हे मालूम नही मै तुमसे कितना प्यार करती हूं ” नॅन्सी धीरे धीरे जॉनके बालोंमें अपना हाथ फेरते हूए बोली.

जॉनने एक प्रेमभरा दृष्टीक्षेप उसकी तरफ डाला.

कुछ देर दोनोंभी कुछ बोले नही. काफी समय ऐसीही शांतीमे गुजर गया. कुछ देर बाद अचानक जॉन उठ खडा हूवा और नॅन्सीको उठनेके लिए हाथ देते हूए बोला, ” चलो अब निकलते है… काफी समय हो गया है ”

उसका हाथ पकडकर वह खडी हो गई.

एक दुसरेका हाथ हाथमें लेकर हौले हौले चलते हूए वे वहांसे चले गए.

इतनी देरसे एक पेढके पिछे छूपा बैठा ऍन्थोनी नॅन्सी और जॉनके चले जानेके बाद बाहर निकल आया. उसका चेहरा गुस्सेसे लाल लाल होगया था…

… ऍन्थोनी वेअरहाउसमें खडा होकर उसकी सारी कहानी बयान कर रहा था. और उसके इर्दगीर्द खडे सॅम और उसकी टीम सब गौरसे सुन रहे थे. उसे हथकडीयां पहनाकर अबभी दो पुलिस उसके पास खडे थे. डिटेक्टीव सॅमभी उसकी हकिकत ध्यान देकर सुन रहा था.

” मैने उसपर बहुत .. मतलब अपनी जानसे जादा प्रेम किया ” ऍंन्थोनीने आह भरते हूए कहा.

” लेकिन मुझे जब पता चला की वह मुझे नही बल्की जॉनको चाहती है … तब मै बहुत निराश, हताश हुवा, मुझे उसका गुस्साभी आया… लेकिन धीरे धीरे मैने अपने आपको समझाया की मै उसे चाहता हू इसका मतलब यह जरुरी नही की वहभी मुझे चाहे… वह किसीकोभी चाहनेके लिए आजाद होनी चाहिए.” ऍन्थोनीने कहा.

” लेकिन तुमने उन चार लोगोंको क्यों मारा ?” सॅमने असली बात पर आते हूए पुछा.

” क्योंकी दुसरा कोईभी नही कर सकता इतना प्रेम मैने उसपर किया था. “” ऍंन्थोनीने अभिमानके साथ कहा.

” जॉननेभी उसपर प्रेम किया था….” सॅमने उसे और छेडनेकी कोशीश करते हूए कहा.

” वह कायर था… नॅन्सी उससे प्रेम करे ऐसी उसकी हैसीयत नही थी..” ऍंन्थोनीने नफरतक के साथ कहा, ” तुम्हे पता है ?… जब उसका बलात्कार होकर कत्ल हूवा था तब जॉनने मुझे एक खत लिखा था ” ऍंन्थोनीने आगे कहा.

” क्या लिखा था उसने ?” सॅमने पुछा.

” लिखा था की उसे नॅन्सीके बलात्कार और कत्लका बदला लेना है … और उसने उन चार गुनाहगारोंको ढूंढा है …. लेकिन उसकी बदला लेनेकी हिम्मत नही बन पा रही है .. वैगेरा .. वैगेरा .. ऐसा उसने काफी कुछ लिखा था… मै एक दोस्तके तौरपर उसे अच्छी तरह जानता था… लेकिन वह इतना डरपोक होगा ऐसा मैने कभी नही सोचा था… फिर ऐसी स्थीतीमें आपही बताईए मैने क्या करता … अगर वह बदला नही ले सकता तो उन चार हैवानोंका बदला लेनेकी जिम्मेदारी मेरी बनती थी… क्योंकी भलेही वह मुझे नही चाहती थी लेकिन मेरातो उसपर सच्चा प्रेम था. …” ऍंन्थोनी भावनाविवश होकर आवेशमें बोल रहा था. वह इतने जल्दी जल्दी और उत्तेजीत होकर बोल रहा था की उसका चेहरा लाल लाल हो गया था और उसके सासोंकी गती बढ गई थी. जब ऍंथोनी बोलते बोलते रुक गया. उसका पुरा शरीर पसीनेसे लथपथ हो गया था. उसे अपने हाथ पैर कमजोर हूए ऐसा महसुस होने लगा. वह एकदमसे निचे बैठ गया. उसने अपना चेहरा अपने घूटनोमें छूपा लिया और फुटफुटकर रोने लगा. इतनी देरसे रोकनेका प्रयास करनेके बावजुद वह अपने आपको रोक नही पाया था.

उसके इर्द गिर्द जमा हूए सारे लोग उसकी तरफ हमदर्दीसे देख रहे थे.


क्रमश:…

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